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Thursday, December 1, 2022

कब भारत होगा भ्रष्टाचार से मुक्त

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भारत में भ्रष्टाचार का रोग बढ़ता ही जा रहा है! ऐसा क्षेत्र नहीं बचा, जहां भ्रष्टाचार व्याप्त ना हो! पंचायत से लेकर शीर्ष स्तर के कार्यालयों, क्लार्क से लेकर बड़े अफसरों तक बड़े बिना घुस के सरकारी फाइलें आगे नहीं सकती! प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर लाल किले से भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर जमकर हमला बोला !
भारत नैतिक मूल्य और आदर्शों का कब्रिस्तान बन गया है! ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई 2020) के अनुसार भ्रष्टाचार देशों की वेटिंग में भारत 86 स्थान पर है! इसके पहले वह 80वें स्थान पर था! पिछले कुछ महीनों से देश की जांच एजेंसियां राजनीतिक भ्रष्टाचार मामलों की पड़ताल कर रही है! विपक्ष का कहना है कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर करती है! असल में भ्रष्टाचार नेताओं के खिलाफ जब भी करवाई होती है तो इस मामले में राजनीति शुरू हो जाती है जिसके चलते ऐसे मामले में दो-चार दिन के शोरगुल के बाद ज्यादा कुछ होता दिखता नहीं है, जबकि इतिहास इसका साक्षी है की भ्रष्ट राजनीतिज्ञों छात्र छाया में ही भ्रष्टाचार पनपता और फलक खुलता है! नेता, अधिकारी और ठेकेदारों का गठजोड़ भ्रष्टाचार को किसी न किसी रूप में जिंदा रखता है! कोई दिन ऐसा नहीं बिकता है जब देश के किसी कोने से भ्रष्टाचार से जुड़े समाचार प्रकाश में ना आते हैं! किसी भी राजनीतिक दल की सता रही हो परंतु केंद्र और राज्य सरकारें आज तक इस बात का दावा नहीं कर सकी की एक भी सरकारी विभाग सौ फीसदी भ्रष्टाचार से मुक्त है! जनसंपर्क वाले तकरीबन सभी विभागों में भ्रष्टाचार मौजूद है!
पिछले दिनों दिल्ली के उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार मामले में यहां के कुछ अफसरों के खिलाफ जैसी कार्रवाई की है, उसे एक बार फिर या जाहिर हुआ है की राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में कितनी बड़ी खाई हो सकती है! उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के माथा काम करने वाले तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था! या स्थित दिल्ली में पार्टी नेताओं की है, जहां उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने का ऐलान किया था और सिर्फ इसी वजह से उस के पक्ष में जन समर्थन उभरा था! ऐसे में आम आदमी के मन में कहीं ना कहीं यह सवाल जरूर उठता है की ईमानदारी अलाप लगाकर सत्ता में चले आए लोग दनादन भ्रष्टाचार के दलदल में क्यों और कैसे फंसते जा रहे हैं? यह सवाल चाह कर भी कोई आम आदमी अपने आका से नहीं पूछ पा रहे हैं! बरामद की गई या धनराशि याद तो केंद्रीय एजेंसियों की अतिरिक्त सरिता का नतीजा है या फिर हमारे तंत्र के खोखला होने का अंदेशा! जीएसटी और डबल टैक्सेशन में फंसी जनता के लिए जहां मेहनत से दो-जून की रोटी कमाना मुश्किल हो रही है वही गोरखधंधे में माहिर खिलाड़ियों के लिए फटाफट कमाई से करोड़ों रुपए अर्जित कर लेना चुटकियों का काम हो गया है! संयोग है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते 27 जुलाई को प्रिवेशन आफ मनी लांड्रिंग एट यानी पीएम ए पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है! इससे धन संशोधन के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी को पर्याप्त मजबूती मिली है! या विपक्ष के लिए डरने तो सत्ता पक्ष के लिए खुश होने की बात है! जब भी काले धन पर प्रहार की बात होती है तो भ्रष्टाचार से परेशान जनता की निराश बढ़ जाती है! स्वीटजरलैंड की सरकार के साथ समझौता की आड में शीश एवं अन्य विदेशी बैंकों में काला धन पार्क आंकड़ों में बताया है कि उनके खाते में भारतीयों और उनकी कंपनियों का धन 2021 के दौरान 50 फ़ीसदी बढ़ गया है! यह रकम 14 सालों के ऊंचे स्तर पर 3 पॉइंट 86 अरब सिस फ्रैंक यानी 30500 करो रुपए से अधिक पर पहुंच गया है! इसमें भारत में स्विट्जरलैंड बैंकों की शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा धन भी शामिल है! इससे पहले वर्ष 2020 के अंत तक स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों का धन 2.55 अरब स्विस फ्रैंक अर्थात 20,700 करोड़ रुपए था! स्वीटजरलैंड एसएनबीके इन आंकड़ों में भारतीयों, प्रवासी भारतीयों या अन्य लोगों के पास स्विस बैंकों में किसी तीसरे देश की इकाइयों के नाम पर होने वाले खातों में जमा धन का विवरण शामिल नहीं है!
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है जो सभी समाजों में सामाजिक और आर्थिक विकास को कमजोर करता है! आज के समय में भ्रष्टाचार से कोई देश, क्षेत्र या समुदाय बचा नहीं है! या दुनिया के सभी हिस्सों में फैल गया है चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक हो और साथ ही लोकतांत्रिक संस्थानों को भी कमजोर करता है! भ्रष्टाचार लोकतंत्र को खोखला करता है, इसलिए ऐसे हर सूरत में रोकना होगा! ऐसी व्यवस्था हो कि भ्रष्टाचार की सूरत में प्रभावशाली व्यक्ति पर भी अंकुश लगे! वही राष्ट्र आदर्श हो सकता है जहां भ्रष्टाचार का नामोनिशान ना हो! हमारे नेता नेता उच्च आदर्शों एवं नैतिक जीवन मूल्यों की सीख देते रहें लेकिन राजनीति, प्रशासन और जनजीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार को नहीं मिटा पाये!

✍ अधिवक्ता नमिता झा

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