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Friday, February 3, 2023

अडानी-अंबानी से भी ज्यादा रोजगार, हर रोज 90 करोड़ की कमाई… कंपनी का नाम जानकर हो जायेंगे हैरान !

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Business News: दूध की बात जब भी होती है तो अमूल (Amul) का नाम सबसे पहले आपकी जुंबा पर आता है। 78 साल पहले शुरू हुई ये कंपनी रोज 100 करोड़ से अधिक लोगों को अपने प्रोडक्ट सर्व करती हैं। आप हैरान रह जाएंगे कि ये कंपनी अंबानी, टाटा और अडानी जैसी बड़ी कंपनियों से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाती है।

एक बार फिर से ये कंपनी चर्चा में है। चर्चा में इसलिए क्योंकि 12 सालों के बाद अचानक से कंपनी के एमडी आरएस सोढ़ी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह जयेन मेहता अब ये जिम्मेदारी संभालेंगे। अमूल में इस बदलाव के बीच आज हम आपको इसकी पूरी कहानी बता रहे हैं।

76 साल पहले गुजरात में आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (Amul) की शुरूआत की गई। 28 साल के मैकेनिकल इंजीनियर वर्गीज कुरियन ने अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर गुजरात के आणंद शहर में इस कंपनी की शुरूआत की ।

जब इस कंपनी की शुरूआत हुई तो रोज 247 लीटर दूध किसानों से इकट्ठा किए जाते थे। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि 76 सालों बाद आज अमूल में रोज 2.50 करोड़ लीटर दूध इकट्ठा किए जाते हैं। आज भारत में 100 करोड़ लोग रोज अमूल को कोई न कोई प्रोडक्ट जरूर इस्तेमाल करते हैं।

अंबानी-अडानी से ज्यादा रोजगारआप सुनकर हैरान हो जाएंगे कि लेकिन रोजगार देने के मामले में अमूल देश की बड़ी कंपनियों को भी पीछे छोड़ रही है। अमूल रोजगार देने के मामले में रिलायंस, अडानी, अंबानी, टाटा ग्रुप को पछाड़ रही है। अडानी करीब 2 लाख लोगों को रोजगार दे रही है। वहीं टाटा ग्रुप के कुल कर्मचारियों की संख्या 8 लाख के करीब है। रिलायंस में 3 से 4 लाख रुपये लोग काम करते हैं। वहीं अमूल में 15 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

प्रोडक्शन, प्लांट वर्कर, ट्रांसपोर्ट, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और सेल्स में अमूल बड़े स्तर पर रोजगार क्रिएट कर रहा है। अमूल से 35 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। कंपनी के पास 87 प्लांट हैं, जो डेयरी प्रोडक्ट, मिठाई आदि तैयार करती है।

रूरल इकॉनॉमी में 30 फीसदीगुजरात के एक गांव से शुरू हुए इस कारोबार में किसानों, चरवाहों, पशुपालनों, महिलाओं को जोड़ा गया। कंपनी के एमडी रहे आरएस सोढ़ी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उनका मकसद गांव के किसानों और पशुपालनों को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।

अमूल रूरल इकोनॉमी में बड़ा योगदान दे रहा है। अमूल रोजाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में करीब 30 फीसदी का योगदान करता है। अमूल का दावा है कि वो ऐसी सहकारी समिति है जो अपनी कमाई का 80 फीसदी हिस्सा किसानों को देती है। अमूल ने लगातार आर्थिक ग्रोथ बनाए रखा। साल 1994 -95 में कहां इसका टर्नओवर 1114 करोड़ रुपये था, वो साल 2020-21 में 39248 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

अमूल और उसके 18 डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स का कुल टर्नओवर 53 हजार करोड़ पर पहुंच गया है।अमूल गर्ल का जवाब नहींअमूल ने अपने प्रोडक्ट के साथ-साथ अपने विज्ञापन पर भी हमेशा से जोर देता रहा है। एक दौर था जब ‘अटली बटली डिलीशियस अमूल’, ‘अमूल दूध पीता है इंडिया’ जैसे विज्ञापन लोगों की जुंबा पर छाए हुए थे। ‘अमूल गर्ल’ को कौन नहीं पहचानता है।

पोल्का डॉटेड फ्रॉक पहने अमूल गर्ल इस ब्रांड की आइडेंटिटी बन चुकी है। दूध और डेयरी प्रोडक्ट में अपना सिक्का जमाने के बाद अमूल ने गैर-डेयरी उत्पादों की ओर अपना विस्तार शुरू कर दिया। फूड तेल, आटा, मिल्क बेस्ड बिवरेज, शहद जैसे एफएमसीजी प्रोडक्ट अमूल ने लॉन्च कर दिया।

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