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Thursday, December 1, 2022

आम आदमी वाले केजरीवाल का चुनावी हिंदुत्व

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सहारा लेने का जब आरोप लगता है तो वह उसी अंदाज में जवाब देते हुए कहते हैं कि दिल्ली सीएम के अनुसार इस वक्त जो कुछ हिंदुत्व के नाम पर हो रहा है वो हिंदुत्व है ही नहीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम हर हिंदू के आराध्य हैं, मेरे हिसाब से रामचंद्र का कहा हुआ एक-एक शब्द, उनकी वाणी, उनके वचन मेरे लिए हिंदुत्व है।उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन, उनसे प्रेरणा और उनका आचरण असली हिंदुत्व है।

केजरीवाल के अनुसार मैं देश के 130 करोड़ लोगों को जोड़ना चाहता हूं। इंसान को इंसान के साथ जोड़ना चाहता हूं। लेकिन यहां एक बात और गौरतलब है कि केजरीवाल पूरी तरह ‘चुनावी हिंदू’ बनना नहीं छोड़ते, लेकिन उनके उलट उनके समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने एक बौद्ध महासभा आयोजन के दौरान हजारों लोगों को शपथ दिलाई, मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण और गौरी, गणेश आदि को भगवान, देवी-देवता नहीं मानूंगा। उनकी पूजा भी नहीं करूंगा। मैं बौद्ध धर्म का पालन करूंगा। इस शपथ समारोह का वीडियो भी वायरल हुआ। दलील दी गई कि बाबा अंबेडकर ने भी 22 बिंदुओं के आधार पर बौद्ध धर्म स्वीकार करने का आह्वान किया था। यह व्यक्ति की निजता है कि वह किस धर्म का पालन करे, लेकिन एक ही आवाज़ में समग्र सनातन धर्म को खारिज करने की कोशिश करे, यह तो रावण ने भी नहीं किया था। हालांकि आलोचना के बाद राजेन्द्र पाल को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

दरअसल भारतीय राजनीति के मौजूदा पाठ में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद दो ऐसे विषय हैं, जिसमें भाजपा बरसों से न केवल पारंगत है, वरन हमेशा से ही शतप्रतिशत नंबर भी लाती रही है। आज यही बड़ा सवाल है कि आखिर भाजपा और नरेंद्र मोदी के सामने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का हिंजुत्व और राष्ट्रवाद कितनी देर टिकेगा, ये शायद बताने की जरूरत नहीं है। ये वही रास्ता है जिस पर चल कर राहुल गांधी या यूं कहें कि कांग्रेस परास्त हो चुकी है। असम से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और उत्तर प्रदेश तक राहुल और प्रियंका इसी पथरीले रास्तों पर चल कर सफलता की आस लगाए थे, नतीजा सबके सामने है।हर चुनाव के पहले राहुल और प्रियंका राज्यों के प्रसिद्ध मंदिरों में माथा टेकने से नहीं चूकते थे। यूपी चुनाव से पहले तो प्रियंका ने गंगा यात्रा भी थी और प्रयागराज में संगम तीरे शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने भी गई थी।लेकिन ये सब भाजपा के हिंदुत्व के आगे नहीं टिका। मतदाताओं को कोई भ्रम नहीं हुआ। दरअसल केजरीवाल ये भूल रहे हैं कि जनता ने कांग्रेस को दिल्ली की गद्दी से उतार कर उनको इस लिए नहीं चुना था कि वह अपने अंदर के हिंदुत्व को चुनावी मौसम और राज्यों की राजनीतिक पृष्ठभूमि के हिसाब से पेश करें। वरन उन्हें इसलिए चुना गया था कि वो एक अलग तरीके के राजनीति का फॉर्मूला लेकर लोगों के बीच गए थे।ऐसे में आप भले थोड़े समय के लिए भाजपा को चुनौती दे सकती है।

लेकिन ये भी उतना सच है कि नकली सामानों का बाजार शायद ही कभी टिकाऊ होता है। जब असली धातु उपलब्ध है, तो कोई नकली के पीछे क्यों भागेगा? भाजपा को हराने के लिए मतदाताओं के सामने स्पष्ट विकल्प पेश करना होगा। तभी वे अपनी निष्ठा बदलने को तैयार होंगे, जैसा कि उन्होंने अतीत में कई बार किया है। भाजपा का हिंदुत्व 24 कैरेट सोने का है और सरसों पुराना एवं परिस्थितियों की भट्टी में तप कर खरा भी हो चुका है। हिन्दुत्व को लेकर बीजेपी की विचारधारा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान से चल रही है। वह बहुत व्यापक है जिसे आरएसएस चला रहा है। जबकि केजरीवाल का हिन्दुत्व विचारधारा हीन है। वह दिल्ली में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में अलग अंदाज में वोट मांगते देखे गए हैं। वैसे गुजरात चुनाव के पहले दिल्ली नगर निगम चुनावों में ही केजरीवाल के चुनावी मौसम के हिंदुत्व का इम्तिहान हो जायेगा।

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए SANSAD VANI उत्तरदायी नहीं है.)

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