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Friday, December 2, 2022

ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों पर श्रद्धालुओं डूबते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य का

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रोहनिया/संसद वाणी

इस पर्व में जल और सूर्य की महत्ता है, जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। सूर्य षष्टी या छठ व्रत सूर्य भगवान को समर्पित है। इस महापर्व में सूर्य नारायण के साथ देवी षष्टी की पूजा भी होती है। काशी के पावन घाटों पर इस पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा हैं। सबके मन में यही श्रद्धा यही होती है की भगवान भास्कर और छठी मैया मन की मुरादे पूरी करेंगी।

लाखों श्रद्धालुओं ने डूबते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य-
छठ पर्व पर ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों पर गंगापुर,भस्करा तालाब, शुलंटकेश्वर महादेव, भैरव तालाब,आस्था का जन सैलाब उमड़ पडा। गंगा की गोद में खड़े हो कर लाखों हाथों ने डूबते हुए सूर्य को इस कामना के साथ विदा कर रहे थे कि कल एक नए तेज के साथ आयेंगे और अपनी रौशनी से उनके घर को खुशियों से भर देंगे। इस पूजा में पानी और सूर्य का महत्व है। रंग बिरंगे वस्त्रों में सजी संवरी सभी महिलायें आस्था के उस रंग में रंगी हैं जिसकी छटा छठी मैया के गीत से और भी अलौकिक हो उठता है।
इस दौरान घाटों पर प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक चौबंद किया गया था जिससे की श्रद्धालुओं को कोई परेशानी या ना हो सके।

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