2 C
Munich
Friday, December 2, 2022

लगातार 7 वें वर्ष दिवाली पर क्लाइमेट एजेंडा की रिपोर्ट जारी, 6 गुणा अधिक प्रदूषित हुई काशी की आबोहवा,

Must read

Advertisement
Advertisement

वाराणसी/संसद वाणी

✍संसद वाणी संवाददाता की रिपोर्ट

जम कर फूटे पटाखों ने फिर बिगाड़ी बनारस की आबोहवा, एक बार फिर जूमला साबित हुआ ग्रीन पटाखा इंग्लिशिया लाइन, पांडेयपुर

सारनाथ, लहुराबीर बने गैस चेंबर, महमूरगंज और सिगरा रहे तुलनात्मक रूप से साफ़,

शहर के 12 जगहों पर की गयी निगरानी, पटाखों के साथ साथ खराब शहरी कचरा प्रबंधन भी मुख्य जिम्मेदार.
 
क्लाइमेट एजेंडा की ओर से हर वर्ष की तरह सातवीं बार इस वर्ष भी दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की एक विस्तृत रिपोर्ट आज 26 अक्टूबर 2022 को दिन में 1 बजे जारी की गयी. इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में ग्रीन पटाखे और जिला प्रशासन की ओर से हुई अपील इस बार पुनः बेअसर साबित हुई. कोविड 19 के साथ साथ अन्य श्वसन सम्बन्धी संक्रमण के खतरों के मद्देनजर, बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष के लिए जारी NGT के दिशा निर्देशों की खुल कर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूकदर्शक बना रहा. रात्री दस बजे के बाद पूर्ण रूप से पटाखा प्रतिबन्ध के लिए जारी आदेश को ताक पर रखते हुए काशीवासियों ने जहां एक तरफ जम कर पटाखे बजाये, वहीं दूसरी ओर इन पटाखों से शहर में पी एम 2.5, पी एम 10 और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), दोनों के ही मानकों की तुलना में काफी खराब हो गया.

प्राप्त आंकड़ों से यह साफ़ जाहिर है कि न केवल बच्चे, बूढ़े बल्कि कोविड समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से कमजोर हो चुके फेफड़ों की चिंता से मुक्त हो कर काशीवासियों ने अपने शहर को एक गैस चेंबर में तब्दील कर दिया.

शहर के 12 विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता जांच की मशीने लगा कर दिवाली की अगली सुबह 3 बजे से 8 बजे तक यह आंकड़े एकत्र किये गए. प्राप्त आंकड़ों के बारे में मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया “शहर में पी एम 10 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा. इंगलिशिया लाइन, पांडेयपुर और आशापुर सबसे अधिक प्रदूषित रहा जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक विश्व स्वास्थ्य संगठन की तुलना में 6 गुणा अधिक प्रदूषित रहा जबकि भारत सरकार द्वारा घोषित मानकों की तुलना में उपरोक्त तीनों स्थान तीन गुणा अधिक प्रदूषित पाए गये. लहुराबीर, आशापुर और मैदागिन क्षेत्र भी कमोबेश एक जैसे ही पाए गये जहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक डब्लू एच ओ के मानकों की तुलना में लगभग 5 गुणा अधिक प्रदूषित रहा जबकि भारत सरकार के मानकों की तुलना में 2.5 गुणा अधिक प्रदूषित रहा. (विस्तृत टेबल संलग्न). ज्ञात हो कि डब्ल्यू एच ओ के मानको के अनुसार जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ऊपर जाए तो हवा को प्रदूषित मानते हैं, जबकि भारत सरकार के द्वारा तय मानकों के अनुसार जब यह आंकड़ा 100 के पार पहुंचे तब शहर को प्रदूषित माना जाता है. लम्बे समय से डब्ल्यू एच ओ का यह आग्रह है कि वैश्विक स्तर पर जन स्वास्थय सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी देश उनके द्वारा घोषित मानदंड का ही अनुपालन सुनिश्चित करें.

कोविड संक्रमण के कारण पहले से ही लाखों लोगों के कमजोर हो चुके फेफड़ों समेत बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों व पहले से ही अन्य किसी बीमारियों से ग्रषित व्यक्तियों के समक्ष आसन्न खतरों के बारे में एकता शेखर ने कहा “विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी अध्ययनों के अनुसार हवा में बढ़ते हुए प्रदूषण से उपरोक्त सभी किस्म के व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है. इन्ही अध्ययनों का संज्ञान लेते हुए माननीय राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने अत्यधिक प्रदूषित हवा वाले शहरों में पटाखे के क्रय विक्रय पर कुछ शर्तों के आधार पर  प्रतिबन्ध लगाने का आदेश जारी किया था. इसके अनुपालन की जिम्मेदारी राज्य शासन ने सम्बंधित जिला प्रशासनों को दी थी लेकिन उक्त आदेश की अवहेलना करने वालों के सामने जिला प्रशासन बौना साबित हुआ. इससे न केवल शहर की आबोहवा खराब हुई, बल्कि श्वांस संबंधी रोगों का उपचार कराने वाले सहित अन्य बच्चे, बूढ़े व कोविड 19 के शिकार रह चुके व्यक्तियों के सामने बारम्बार यह विकट परिस्थिति पैदा हुई है. प्रशासन ने जिम्मेदारी का परिचय दिया होता, तो ऐसा होने से रोका जा सकता था.”

हालांकि, दिवाली के समय खराब हुई आबोहवा के लिये पटाखों के साथ साथ शहर की बेहद खराब कचरा प्रबंधन व्यवस्था भी जिम्मेदार है. शहर के विभिन्न इलाकों में दिवाली के समय हुई घरों की साफ़ सफाई के बाद कचरे का जलाया जाना भी वायु प्रदूषण को काफी हद तक बढाता है. क्लाइमेट एजेंडा ने हमेशा यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि प्रदूषण नियंत्रण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि नगर निगम, परिवहन, पी डब्ल्यू डी समेत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आम नागरिकों को अपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से ही प्रदूषण नियंत्रण संभव हो सकेगा.

Advertisement
- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article