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Thursday, February 2, 2023

जागरुकता ही एड्स से बचाव का बेहतर उपाय, विश्व एचआईवी/एड्स दिवस पर रैली, हस्ताक्षर अभियान व गोष्ठियों का हुआ आयोजन

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वाराणसी/संसद वाणी
विश्व एचआईवी/एड्स दिवस पर गुरूवार को जिले में विभिन्न स्थानों पर रैली निकालने, हस्ताक्षर अभियान चलाने के साथ ही जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को एड्स के खतरे से अवगत कराते हुए एचआईवी संक्रमण से बचाव की जानकारी दी गयी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संदीप चौधरी ने कहा कि एचआईवी संक्रमण के कारणों के बारे में समाज को जागरूक करने से ही एड्स की बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया की प्रतिवर्ष एक दिसंबर को विश्व एचआईवी/एड्स दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इसके खतरे से सतर्क किया जा सके।
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में आयोजित जागरुकता गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके सिंह ने कहा कि एड्स की बीमारी छुआ-छूत से नहीं, असुरक्षित यौन सम्बन्धों समेत अन्य कारणों से होती है, लिहाजा हमें इस खतरनाक रोग के प्रति खुद सतर्क रहने के साथ ही इस बारे में समाज को भी जागरूक करना होगा। उन्होंने बताया कि एचआईवी एक वायरस है। जब यह शरीर में पाया जाता है तो उस अवस्था को एचआईवी पॉजीटिव कहते हैं। एचआईवी संक्रमण के कारण व्यक्ति में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती चली जाती है। नतीजा होता है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति एक साथ कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इसी अवस्था को ही एड्स कहा जाता है। उन्होंने कहा कि एचआईवी पाजीटिव होने के बाद अगर समय से उपचार शुरू हो जाए तो पीड़ित सामान्य जीवन जी सकता है। उपचार न होने से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और उसे तमाम तरह के रोग हो जाते है। इसलिए इसका समय से उपचार जरूरी है।
कार्यक्रम में एआरटी सेंटर की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रीति अग्रवाल ने एचआईवी संक्रमण के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी का संक्रमण असुरक्षित यौन सम्बन्धों के अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़वाने, संक्रमित सुई के प्रयोग से भी होता है। इसके अलावा एचआईवी संक्रमित माता-पिता से होने वाले बच्चे को भी एचआईवी संक्रमण का खतरा रहता है। लिहाजा हमें इन सबके प्रति बेहद ही सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित को रोग छिपाने की बजाय उसका फौरन उपचार शुरू कराना चाहिए। यह उपचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय के अलावा सर सुन्दरलाल चिकित्सालय स्थित एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट) सेंटर में निःशुल्क होता है। एआरटी सेंटर के डा. एसके सिंह ने कहा कि एचआईवी संक्रमित को नियमित उपचार के साथ-साथ अपने खान-पान व व्यायाम पर भी ध्यान देने के साथ ही समय-समय पर चिकित्सकीय सलाह भी लेते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग बीच में दवा छोड़ देने है। ऐसे लोगों के लिए ही एचआईवी का संक्रमण जानलेवा साबित हो जाता है। उन्होंने बताया कि एआरटी सेंटर में एचआईवी संक्रमितों को निःशुल्क दवा देने के साथ ही उनकी बेहतर जीवन जीने की सलाह भी दी जाती है। कार्यक्रम में काउंसलर अनीता गौड़, सुष्मिता तिवारी, अर्चना उपाध्याय के अलावा एआरटी सेंटर के मयंक चौबे, अजीत, राघवेन्द्र, राजेश, प्रमिला, अमिताभ मिश्र, नौशाद आलम शामिल रहे।
मण्डलीय अस्पताल से निकाली रैली, चलाया हस्ताक्षर अभियान – विश्व एड्स दिवस के अवसर पर श्री शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय में उमाकान्त फाउण्डेशन और मानव गौरव निर्माण संस्थान के सहयोग से एड्स जागरुकता रैली निकाली गयी साथ ही हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। रैली को मण्डलीय चिकित्सालय के एसआईसी घनश्याम मौर्या ने हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया । यह रैली अस्पताल परिसरल से पिपलानी कटरा, होते हुये लहुराबीर तक गयी और पुनः जिला महिला चिकित्सालय में प्रमुख अधीक्षक कार्यलय के पास आकर समाप्त हो गयी। रैली में एचआईवी एवं एसएसके, आईसीटीसी के प्रभारी अधिकारी डा. मुकुन्दजी श्रीवास्तव, पीएफओ संजय सिंह, उमाकांत फाउण्डेशन के परियोजना निदेशक जीतेन्द्र प्रताप सिंह, मानव गौरव निर्माण संस्थान के निदेशक हरिशचन्द्र वर्मा, एचआईवी/टीबी के कोआर्डिनेटर विनय मिश्र, ओएसटी सेंटर के काउसलर प्रेमप्रकाश समेत काफी संख्या में लोग शामिल थे। बाद में हुई गोष्ठी में लोगों को एचआईवी संक्रमण से बचाव की जानकारी दी गयी।

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