July 4, 2022

सत्यम शिवम सुन्दरम् के उद्घोष को जन-जीवन में चरित्रार्थ करने का पर्व हैं शिवरात्रि–

सत्यम शिवम सुन्दरम् ,सत्यमेव जयते, अहिंसा परमोधर्मः जैसे उपनिषदीय उद्घोष हमारी सदियों पुरानी सनातन संस्कृति का मार्गदर्शन और पथ प्रदर्शन करते रहे हैं। अत्यंत प्राचीन...

चट्टी चौराहों पर चुनावी चर्चा से गायब है गरीबी जैसे चुनौतीपूर्ण मुद्दे—

गरीबी अभिशाप नहीं बल्कि मानव निर्मित षड्यंत्र है--‐-- महात्मा गाँधीस्वाधीनता उपरांत गरीबी भारत में एक प्रमुख चुनौती रही हैं जो कमोबेश आज भी एक प्रमुख...

मनभावन सुहावन आया बसंत

मनभावन सुहावन आया बसंतबाग तडांग घर-ऑगन आया बसंत।यौवन पर आया खुमार अल्हड़पन,मादक बयार मौसम हुआ मदमस्तलेकर उम्मीद,कर नीरसता का अंत,हर्षित बसुधा व्योम और दिग-दिगंत,मनभावन सुहावन...

9 जनवरी -प्रवासी दिवस -प्रजातिवाद,नस्लवाद और रंगभेद के खिलाफ सशक्त आंदोलन की थाती लेकर लौटे थे महात्मा गाँधी–

9 जनवरी 1915 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को भारत में प्रवासी...

10 दिसंबर–मानवाधिकार दिवस

हथियारों की अंधी दौड़ में दौड़ती-हाँफती दुनिया मे मानवाधिकारो की बात बेमानी है-- एक सभ्य सुसंस्कृत समाज में मनुष्य के आधारभूत अधिकारों की संकल्पना अत्यंत...

संविधान दिवस-:अभी भी अधूरे हैं संविधान के सुनहरे संकल्प–

महान स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के सपनों को साकार करने के लिए संकल्प पत्र के रूप में भारत का संविधान आज ही के दिन 26 नवम्बर...

पग-पग प्रकाश जग में उजियारा भर जाए —

पग-पग प्रकाश जग में उजियारा भर जाएँ ,बसुन्धरा से अम्बर तक हर अंधियारा छट जाएँ।ज्योतिर्मय प्रज्ञा का दीप जले हर हृदयांगन में,निर्भय जीवन की ज्योति...

उत्सवधर्मी देश के उत्सवों की उत्सवधर्मिता, सार्थकता और महत्ता—

इंग्लैड के मशहूर इतिहासकार ए एल वाशम ने 1954 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "अद्भुत भारत " में कहा था कि-भारत एक उत्सवधर्मी देश है और...

जितने बडे लडाकू थे उतने ही बडे पढाकू थे शहीद-ए-आज़म भगत सिंह —

इन्हीं पागल दिमागों में आजादी के गुच्छे है ।हमें पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे हैं।। शहादत की शानदार परम्पराओं में सम्पूर्ण भारतीय...