10 दिसंबर–मानवाधिकार दिवस

हथियारों की अंधी दौड़ में दौड़ती-हाँफती दुनिया मे मानवाधिकारो की बात बेमानी है– एक सभ्य सुसंस्कृत समाज में मनुष्य के आधारभूत अधिकारों की संकल्पना अत्यंत प्राचीन काल से लगभग समस्त धार्मिक ग्रन्थों, महावीर स्वामी, महात्मा बुद्ध, मुहम्मद साहब और ईसामसीह जैसे धर्म प्रवर्तकों , सुप्रसिद्ध संतों और मानवतावादी विचारकों के उपदेशो और विचारों में किसी …

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