August 12, 2022

बाबा श्री काशी विश्वनाथ की नगरी में शानदार कार्यकाल के बाद यहां से विदा हो रहे,जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा।

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वाराणसी/संसद वाणी

सन 2019 में सूर्योपासना के महापर्व छठ के दिन ही वाराणसी जिले की कमान आईएएस अफसर कौशल राज शर्मा के हाथों आयी थी। पौराणिक मान्यता भी है कि भगवान सूर्य शासन और प्रशासन के देवता हैं। ऐसे में छठ पर्व के दिन ऐसा लोक प्रशासक मिला जिसे काशी की जनता लंबे समय तक याद रखेगी। तकरीबन ढाई साल तक बाबा श्री काशीविश्वनाथ की नगरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जैसे अति महत्वपूर्ण जिले की प्रशासनिक बागडोर संभालने वाले कौशल राज शर्मा आखिरकार अब यहां से विदा हो रहे हैं। – रवींद्रपुरी कालोनी के निजी अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा
IAS कौशल राज शर्मा का 2 साल 9 महीने का वाराणसी में सफरनामा 2 नवम्बर 2019 को संभाला कार्यकाल IAS कौशल राज शर्मा
वाराणसी में अपने कार्यकाल की शुरुआत करते कौशल राज शर्मा
2006 बैच के आईएएस कौशल राज शर्मा वाराणसी के ढाई साल तक लखनऊ में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रहे। 2 नवम्बर 2019 को उन्होंने काशी में बाबा विश्वनाथ और काल भैरव के आशीर्वाद से 57वें कलक्टर के रूप में कार्यभार सम्भाला। कार्यभार संभालते ही उन्होंने आपसी सौहार्द के सन्देश दिए थे। साथ ही अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा था कि वाराणसी को देश और प्रदेश का मॉडल जिला बनाना ही लक्ष्य है। देव दीपावली, गंगा महोत्सव के साथ-साथ उसी महीने आने वाले अयोध्या राम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के दौरान जनपद में सांप्रदायिक सद्भाव बनाने को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताया था। कार्यकाल शुरू करने के साथ ही अंतहीन चुनौतियों ने मानों जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की परीक्षा लेना शुरू कर दिया था। बारावफात के मंच से कौमी-एकता का संदेश
मुसलमानों की बड़ी आबादी वाले राजधानी लखनऊ में ढाई साल का कार्यकाल बिताकर आये जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने वाराणसी में भी अमन चैन का पैगाम दिया और 12 नवम्बर 2019 को बारावफात के बेनियाबाग में होने वाले प्रोग्राम में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद मुस्लिम भाइयों को बरावफ़ात की शुभकामनाएं दी और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पुलिस और प्रशासन उनके साथ हैं। कोई भी दिक्कत हो तो बेझिझक उन्हें सूचित करें। रवींद्रपुरी कालोनी के निजी अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामाCAA और NRC का विरोध कर रहे लोगों पर बरसी लाठियां IAS कौशल राज शर्मा
बजरडीहा में हुए बवाल के दौरान पुलिस फोर्स संग मोर्चे पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के विरोध में पूरे देश में एक अल्प संख्यक समुदाय सड़क पर था। इसको लेकर समुदाय के लोगों को जिला प्रशासन समेत पुलिस समझा रही थी। 20 दिसंबर 2019 शुक्रवार के दिन बजरडीहा में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ जिला प्रशासन की वार्ता के दौरान अचानक माहौल बिगड़ गया था। पथराव, लाठीचार्ज और भगदड़ में नौ पुलिस कर्मी और 14 अन्य लोग गभीर रूप से घायल हो गए थे। हालांकि घायलों की संख्या अधिक थी। घायलों को बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। भगदड़ में घायल मोहम्मद सगीर की रात में मौत हो गई। इस दौरान DM कौशल राज शर्मा ने भी उपद्रवियों पर जमकर लाठी चलाई और उनके ही प्रयासों से मामले में भेलूपुर थाने में 28 नामजद और 2000 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। पहली बार वाराणसी ने देखा इंटरनेट का बंद होना बजरडीहा में जुमे की नमाज के बाद बवाल इस कदर बढ़ा कि जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने तुरंत ही शासन को इससे अवगत कराया और इंटरनेट बंदी की परमिशन ली और शहर में शाम तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी गयी। इंटरनेट बंद होने से कई सारे काम रुक गए पर काशी के अमन-चैन के लिए यह आवश्यक था। इससे कई सारे ऑनलाइन कार्य भी प्रभावित हुए। शहर पर मंडरा रहे दंगों की आशंका को दूर करने के लिये हर स्तर पर प्रयास शुरू किये गये। शहर काजी मौलाना गुलाम यासीन के सहयोग से सड़क पर उतर कर मुस्लिमों को समझाने का काम हुआ बेनियाबाग को शाहीन बाग बनाने की कोशिश की नाकाम CAA-NRC का मुद्दा देश में हावी हुआ तो दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर देश में कई जगह आंदोलन शुरू हुए। इसी क्रम में वाराणसी के बेनियाबाग में भी 23 जनवरी 2020 को कुछ महिलाएं हाथों में तख्तियां और गोद में बच्चों को लेकर पहुंच गयीं। विरोध शुरू हो गया, जैसे ही प्रशासन को इसकी सूचना मिली मौके पर भरी पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अमले के साथ जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा मौके पर पहुंचे और महिलाओं को समझा-बुझाकर उनके घर भेजा साथ ही इस कृत्य में शामिल सैकड़ों लोगों के ऊपर कार्रवाई भी की। कोरोना में जनता का किया सहयोग, मीडिया और पब्लिक के बीच बने चेन IAS कौशल राज शर्मा कोरोना काल में वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते आईएएस कौशल राज शर्मा
साल 2020 में दुनिया ने कोरोना का कहर भी देखा। इस कहर से भारत भी अछूता नहीं रहा। वाराणसी में कोरोना वायरस का पहला केस 21 मार्च 2020 को मिला। इस मामले में जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई और स्वास्थ्य अमले को अलर्ट कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने 23 मार्च से जनता कर्फ्यू का एलान किया। यह कर्फ्यू बढ़ता ही गया और लंबा लॉकडाउन बन गया। खुद ग्राहक बनकर दुकान पर छापेमारी आईएएस कौशल राज शर्मा कोरोना काल में एसएसपी प्रभाकर चौधरी के साथ बाजार में छापेमारी करने पहुंचे कौशल राज शर्मा
कोरोना काल के बुरे दौर में जब पूरी दुनिया परेशान थी, जब ‘आपदा में अवसर’ तलाशने वाले भी सक्रिय हो उठे। जनता की ओर से लगातार कालाबाजारी की शिकायते भी आम हो चलीं। इसबीच एक दिन चुपचाप जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और एसएसपी प्रभाकर चौधरी सादे कपड़ों में ग्राहक बनकर राशन की दुकान पर पहुंचे और कालाबाजारी करने वालों को रंगे हाथ पकड़ा। ये घटना देशभर के मीडिया की सुर्खियां बनीं। लोगों ने भी डीएम के इस कदम का खुले दिन से स्वागत किया।इंसानों ही नहीं जानवारों के भी मददगार बने आईएएस कौशल राज शर्मा
कोरोना काल में गोदौलिया चौराहे पर कुत्तों को खाना खिलाते कौशल राज शर्मा लॉकडाउन में जब वाराणसी की जनता अपने अपने घरों में खुद को और अपने परिजनों की सुरक्षा के लिये बैठी थी उस वक्त भी जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा पूरे दिन सड़क पर जिले के एक छोर से दूसरे छोर तक व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग करते रहे। यहां तक कि सूनसान रातों में भी उन्हें शहर के विभिन्न इलाकों में जानवरों को भोजन कराते देखा गया। जिन आवारा कुत्तों को लॉकडाउन में खाने पीने की दिक्कत हुई डीएम ने खुद पहल करते हुए और समाजसेवियों की मदद से उनतक भोजन पहुंचवाया।

कोई भी भूखा न सोने पाये

इसके अलावा प्रवासी मजदूरों तथा सड़क किनारे रहने वाले गरीबों की भूख का इंतजाम कराने के लिये डीएम ने समाजसेवी संस्थाओं का आह्वान कर लोगों की मदद के लिये पास जारी किया। कोई भी भूखा ना सोने पाये इसके लिये लगातार प्रयास किया गया। इस कार्य में वाराणसी पुलिस ने भी भरपूर सहायता की और थाने-चौकियों से भी इलाके के गरीबों को भोजन उपलब्ध कराया जाने लगा। सबके सम्मिलित प्रयास से जून 2020 के बाद लॉकडाउन को पूरी तरह से हटाया गया और फिर व्यापारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से व्यवस्थाओं को पटरी पर लाया गया।

कोरोना गया तो आ धमका पाकिस्तानी टिड्डि दल
अभी कोरोना लॉकडाउन खत्म हो ही रहा था कि तभी जून 2020 में पाकिस्तान से टिड्डियों का एक दल उत्तर भारत की फसलों पर हमला बोलते हुए वाराणसी पहुंच गया। हालांकि इससे पहले ही डीएम ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को अलर्ट करते हुए खुद भी मोर्चा संभाल लिया और पिंडरा ब्लॉक के कई गांवों के खेतों में देर रात तक टिड्डियों के खिलाफ अभियान में जुटे रहे।

कोरोना की दूसरी लहर : सब छिप गये, मगर अपनी टीम के साथ मोर्चे पर डटे रहे डीएम साल 2021 के फरवरी महीने में एक बार फिर अपने दूसरे और खतरनाक वैरिएंट के साथ कोरोना लौटा। लोगों को सांस लेने में दिक्कत होना शुरू हुई। 90 प्रतिशत मरीज पहले और बाद में 99 प्रतिशत मरीज अस्पतालों में एडमिट होने लगे। त्राहि-त्राहि के उस वक्त में जब स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अपने अपने घरों में बैठ गये थे, उस वक्त भी जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने अपनी पूरी टीम के साथ वाराणसी में मोर्चा संभाले रखा। कोरोना का कहर तेज होने पर डीएम कौशल राज शर्मा खुद मीडिया के सामने आए और वाराणसी में दूसरी लहर से निपटने की तैयारियों के बाबत एक एक सवाल का सामना किया।

खुद व्यक्तिगत तौर पर भी करते रहे मदद
कोविड की दूसरी लहर के दौरान वाराणसी में पूरे सिस्टम को पटरी पर बनाये रखना सबसे बड़ा जोखिम का काम था, इस दौरान अल सुबह से लेकर देर रात तक डीएम कौशल राज शर्मा एक एक चीज की मॉनीटरिंग खुद करते रहे। वहीं इन सब के बीच वे व्यक्तिगत तौर पर लोगों की मदद करते भी दिखे। सीयूजी नंबर पर किसी भी परेशान व्यक्ति का फोन आने पर जरूरत के हिसाब से उसे अस्पताल में बेड उपलब्ध कराना, ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर रेमडिसीवर इंजेक्शन तक मुहैया कराते रहे।

मिला पूर्व ब्यूरोक्रेट एके शर्मा का साथ
इसी बीच शासन की ओर से पूर्व ब्येरोक्रेट और बीजेपी नेता ए के शर्मा को वाराणसी में कोविड से निपटने के लिये लगाया गया। पूर्व आईएएस एके शर्मा का साथ मिलते ही जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने युद्धस्तर पर वाराणसी में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, जिसका परिणाम रहा कि कुछ ही दिन में हालात काबू में आने लगे। डीएम ने अपने कॉन्टेक्ट्स के आधार पर विभिन्न जिलों से ऑक्सीजन मंगाना शुरू किया। बाद में किल्लत और बढ़ी तो उन्होंने सभी ऑक्सीजन प्रदाताओं को 24 घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल करने का आदेश दिया। उसके अलावा टाटा जमशेदपुर के स्टील प्लांट से पहले बाई रोड और फिर ट्रेन से ऑक्सीजन मंगवाना शुरू किया। इसके अलावा उन्ही के कार्यकाल में सेना की एक विंग डीआरडीओ ने वाराणसी में एक सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल भी बीएचयू में तैयार किया। सरकारी योजनाओं को लगावाए पंख वाराणसी में बीते ढाई साल में विकास कार्यों के तमाम प्रोजेक्ट्स ने मूर्त रूप लिया। इसके लिये भी एक बड़ा श्रेय IAS कौशल राज शर्मा को दिया जाएगा। उन्होंने जनपद में चल रही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की भी समय-समय पर समीक्षा की और कार्यदायी संस्थाओं की क्लास भी लगायी। कई सारे कार्य को तय समय पर पूरा कराये जाने को लेकर उन्होंने कमिश्नर दीपक अग्रवाल के दिशानिर्देश में कई अहम् फैसले लिए और काशी में तमाम बड़ी योजनाओं को पूरा करवाया। इनमें रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर से लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट भी शामिल है।

सकुशल संपन्न कराया चुनाव, संयम से लिया काम
IAS कौशल राज शर्मा के कार्यकाल में हाल ही में विधानसभा चुनाव सकुशल संपन्न हुआ है, साथ ही स्थानीय प्राधिकारी चुनाव को भी उन्होंने ने ही जिला निर्वाचन अधिकारी बनकर संपन्न करवाया। विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद 8 मार्च 2022 को पहड़िया मंडी में हुए बवाल को सयंमित तरीके से उन्होंने हैंडिल किया। आक्रोशित भीड़ उन्हें लगातार निशाना बनाते रही, अपशब्द कहती रही लेकिन वो पूरी तरह से संयमित बने रहे। पूरी रात जगकर उन्होंने ना सिर्फ ईवीएम मशीनों को चेक कराया बल्कि आक्रोशित नेताओं को भी समझाते बुझाते रहे। उनका वह संयम हमेशा वाराणसी की जनता याद रखेगी।

मिला प्रधानमंत्री एक्सिलेंस अवार्ड जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को 2020 में फेम इंडिया मैग्जीन की ओर से देशभर के 50 सर्वश्रेष्ठ आईएएस अफसरों की लिस्ट में स्थान दिया गया। इन्हें ‘कर्तव्यपरायण’ अधिकारी के विशेषण से विभूषित किया गया। वहीं 2022 में सिविल सर्विस डे के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में कौशल राज शर्मा को पीएम एक्सिलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया। यह सम्मान प्रधानमंत्री स्वनिधि कार्यक्रम श्रेणी में साल 2021 में वाराणसी को देशभर में प्रथम स्थान पर आने पर मिला। हाल ही में बेंगलूरु में हुए दक्षिण भारत के अधिकारियों के सम्मेलन में कौशल राज शर्मा ने पीएम स्वनिधि योजना की सफलता की कहानी को विस्तार से सबके सामने रखा था। प्रांजल यादव भी थे काफी लोकप्रिय वाराणसी के पूर्व जिलाधिकारी प्रांजल यादव
ऐसा नहीं है कि काशी में इससे पहले लोकप्रिय अधिकारियों ने कमान नहीं संभाली है। कुछ वर्ष पूर्व वाराणसी में प्रांजल यादव ने डीएम बनने के साथ ही शहर में जिस तरह से सड़क चौड़ीकरण के कार्य को अपनी निडर प्रशासनिक क्षमता के साथ अंजाम दिया था, उसकी कायल आज भी यहां की जनता है। प्रांजल यादव की ही देन है कि शहर के कई संकरे इलाकों में आज चौड़ी सड़कें हैं। इसके अलावा बादल चटर्जी और बाबा हरदेव सिंह जैसे प्रशासनिक अफसरों को भी वाराणसी के बुजुर्ग याद करते हैं। बावजूद इसके अपने पूरे कार्यकाल में जितनी कठिन परिस्थितियां जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के सामने आयीं, उतना किसी दूसरे प्रशासनिक अफसर को अबतक झेलना नहीं पड़ा। आलोचनाओं से परे नहीं सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति आलोचनाओं से परे नहीं हो सकता। ऐसे में वाराणसी के जिलाधिकारी का पद संभालने के दौरान कौशल राज शर्मा भी अपवाद नहीं रहे। विपक्षी दलों के निशाने पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा सदैव रहे। जिला पंचायत चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव तथा विधानपरिषद् चुनाव के दौरान भी विपक्ष के राजनेताओं ने उनपर सत्ता पक्ष के लिये कार्य करने का आरोप लगाया। हालांकि ये भी सच है कि चुनाव के दौरान ऐसी आलोचनाएं हर जिलाधिकारी के मत्थे मढ़ी जाती रही हैं। 2014 में सपा सरकार के दौरान वाराणसी के जिलाधिकारी रहे प्रांजल यादव पर भी सत्तापक्ष के इशारे पर काम करने का आरोप भाजपा नेताओं ने लगाया था। यहां तक कि उस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली के लिये बेनियाबाग में जगह ना दिये जाने पर खुद अरुण जेटली और अमित शाह ने डीएम प्रांजल यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बीएचयू गेट पर धरना भी दिया था। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नहीं खोया अपना धैर्य
हरदम अपनी मासूम मुस्कुराहट के साथ नजर आने वाले जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का पूरा कार्यकाल काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। चाहे बात लंबे और कठिन कारोना काल की हो, सीएए-एनआरसी जैसे ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दे पर वाराणसी में सियासी सरगर्मी को प्रशासनिक कुशलता से पार पाने की हो या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की, डीएम कौशल राज शर्मा ने धैयपूर्वक सभी चुनौतियों का ना सिर्फ सामना किया बल्कि काशी की जनता के लिये वे सदैव खड़े रहे। इन सब के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त को गति देने के साथ ही तमाम महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले डीएम भी कौशल राज शर्मा ही रहे। आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति उनकी गहरी दृष्टि ने भी उन्हें काशी का अबतक का सबसे लोकप्रिय प्रशासक बना दिया है।

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