August 9, 2022

आजमगढ़ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूलने करने वाली कंपनी को दो माह में 30 करोड़ रुपये का लगा घाटा

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आजमगढ़/संसद वाणी

आजमगढ़:-लखनऊ-गाजीपुर व आजमगढ़ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनी को दो माह में 30 करोड़ रुपये का घाटा लगा है। इसके चलते कंपनी ने टोल टैक्स वसूली से हाथ खड़े कर दिए हैं। टैक्स वसूली का लक्ष्य हासिल न होने की वजह वाहनों की संख्या का नहीं बढ़ना बताया जा रहा है। लखनऊ से सुल्तानपुर आजमगढ़ होते हुए गाजीपुर के हल्दिया तक बने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर यूपीडा ने करीब दो माह पहले टोल टैक्स वसूली का कार्य शुरू करवाया था। 222 करोड़ों में 2 साल के लिए यह कार्य पाथ इंडिया कंपनी को दिया गया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स की वसूली शुरू होते ही वाहनों की आवाजाही में गिरावट आने लगी। धीरे-धीरे वाहनों की संख्या काफी कम हो गई। इससे टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनी को घाटा होने लगा। सिर्फ दो माह में कंपनी को 30 करोड़ रुपये की चपत लग गई।

लगातार घाटे से परेशान कंपनी ने यूपीडा से दोबारा टेंडर कराने की मांग की। इस मांग पर यूपीडा ने टोल टैक्स वसूलने के लिए दोबारा टेंडर कराया है। अभी वसूली का कार्य पाथ इंडिया कंपनी ही कर रही है। पाथ इंडिया के वरिष्ठ प्रबंधक दिनेश सिंह जादौन ने बताया कि वाहनों की संख्या कम होने से कंपनी को दो माह में करीब 30 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। दोबारा टेंडर मेें कंपनी को कार्य नहीं मिल सका है।

लखनऊ-गाजीपुर वाया आजमगढ़ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का संचालन शुरू हुए करीब आठ माह बीत गए। इसके बाद भी अभी तक एक्सप्रेसवे पर बुनियादी सुुुुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। सिक्सलेन पर अभी तक पेट्रोल पंप, ढाबा, वाहन मरम्मत की दुकान समेत यात्रियों की अन्य जरूरतों के लिए दुकानें उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे आम तौर पर शहर से दूर से गुुुुजरा है।

लखनऊ से गाजीपुर तक करीब 343 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 13 टोल प्लाजा बनाए गए हैं। जिले में चार टोल प्लाजा का निर्माण कराया है। लेकिन इस समय पीढ़ी के पास स्थित एक टोल प्लाजा बंद चल रहा है। कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक ने बताया कि सुल्तानपुर के तीन समेत अन्य जिलों के टोल पर टैक्स वसूली का कार्य चल रहा है।

लगातार घाटे से परेशान कंपनी ने यूपीडा से दोबारा टेंडर कराने की मांग की। इस मांग पर यूपीडा ने टोल टैक्स वसूलने के लिए दोबारा टेंडर कराया है। अभी वसूली का कार्य पाथ इंडिया कंपनी ही कर रही है। पाथ इंडिया के वरिष्ठ प्रबंधक दिनेश सिंह जादौन ने बताया कि वाहनों की संख्या कम होने से कंपनी को दो माह में करीब 30 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। दोबारा टेंडर मेें कंपनी को कार्य नहीं मिल सका है।

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