August 12, 2022

कहानी के माध्यम से जीवन जीने के कौशल को सीखेंगे प्रौढ़।

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इस अभियान के तहत एक करोड़ लोग होंगे साक्षर

आज के परिवेश के हिसाब से रिडिज़ाइनिंग करनी होगी

वाराणसी/संसद वाणी

राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ ,एन सी ई आर टी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा प्रौढ़ शिक्षा सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में
कार्यक्रम की प्रभारी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद , नई दिल्ली की प्रो उषा शर्मा ने कहा कि जो किसी कारण से साक्षर नहीं है लेकिन हमसे ज्यादा ज्ञान रखता है, यह अभियान उनको साक्षर बनाने के लिए है। इस कार्यक्रम में जीवन कौशल की बात होगी।जैसे जीविकोपार्जन के तरीके क्या हों जिसमें निवेश कम से कम हो। यह वोकेशनल एजुकेशन का हिस्सा होगा। पन्द्रह साल और उससे ऊपर के लोगों को शिक्षित करना इस अभियान का दायित्व है। कहानी लेखन के माध्यम से जीवन जीने के कौशल को सिखाया जायेगा। इसमें विद्यार्थियों की भी भूमिका होगी। वे वालंटियर के रूप में कार्य करेंगे और अशिक्षित को शिक्षित बनायेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो ए के त्यागी ने कहा कि आजादी के बाद भी हम प्रौढ़ शिक्षा में पीछे हैं। विषयों को हम कैसे पढ़ायें इस पर नीति ठीक से नहीं बनी, पहले की नीति अभी तक चली आ रही है। जबकि हर क्षेत्र में तमाम बदलाव आये हैं। पहले लोग सूचना से अवगत नहीं हुआ करते थे, परिवार के लोग जागरूक नहीं थे। लेकिन आज हर व्यक्ति के पास विभिन्न रूपों में सूचना है। इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण है कि जो जानते हुए भी नहीं पढ़ते उन्हें कैसे पढ़ाया जाय। आज के परिवेश के हिसाब से रिडिज़ाइनिंग करनी होगी।
कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद , नई दिल्ली के प्रो चमन आरा खां ने कहा कि इस अभियान के तहत एक करोड़ लोगों को साक्षर बनाने का उद्देश्य है। जो 2022 से 27 तक चलेगा। समाज मे पढ़ने लिखने के साथ ही सेहत, आपदा से बचाव सम्बन्धी जानकारी की भी आवश्यकता है। जो कार्यक्रम का हिस्सा है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रो संध्या सिंह ने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पढ़ना चाहते हैं , यह कार्यक्रम उन्हीं के लिए है। यह अभियान पहले सर्व शिक्षा अभियान के तहत शुरू हुआ था लेकिन यह उसका नया रूप है। पढ़ना लिखना अभियान के रूप में होना चाहिए। नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने का बीड़ा एन सी ई आर टी ने उठाया है। स्वागत भाषण देते हुए काशी विद्यापीठ के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो निरंजन सहाय ने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में संसाधन सामग्री निर्माण एवं अभिविन्यास विषय पर कार्यशाला 04 से 08 जुलाई तक आयोजित है। जिसमें भाषा और शिक्षा के 45 विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति में मंथन होगा।
इस कार्यशाला में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अंतर्गत पठन सामग्री निर्माण, संशोधन, उर्दू प्राईमर का संशोधन, भाषा सामग्री का निर्माण एवं संशोधन पर चर्चा होगी।
संचालन प्रो अनुराग कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन शिक्षाशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो शैलेंद्र वर्मा ने किया। पहले दिन की कार्यशाला में एन सी ई आर टी की डॉ यासमीन असरफ तथा याचना गुप्ता ने कहानी लेखन के प्रारूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रौढ़ लोगों की जरूरतों को लेकर कहानी बनानी है। जैसे उनके संख्या संबंधी , स्वास्थ्य संबंधी, पोषण जैसी जानकारी भी समाहित हो।

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