July 1, 2022

ब्रम्हाराष्ट्र एकम,अध्यात्म गोसेवा मिशन ट्रस्ट व गंगा सेवा समिति के तत्वावधान में अस्सी घाट स्थित माँ गंगा का प्राकट्य महोत्सव मनाया गया।

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वाराणसी/संसद वाणी

आज दिनांक 9 जून को गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में ब्रम्हाराष्ट्र एकम , अध्यात्म गोसेवा मिशन ट्रस्ट व गंगा सेवा समिति के तत्वावधान में काशी के अस्सी घाट स्थित ,माँ गंगा का प्राकट्य महोत्सव मनाया गया। जिसके आयोजन प्रमुख श्री पंकज शास्त्री जी महाराज , आयोजन सचिव सचिन मिश्र, संयोजीका प्रिया मिश्रा व सह आयोजन बलराम मिश्र जी रहे। आज माँ गंगा को छप्पन भोग लगाया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति सुश्री प्रियांशी यादव द्वारा कत्थक नृत्य व डॉ अमलेश शुक्ल द्वारा भजन गीतो से किया गया।तत्पश्चात सभी भक्तगण व श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण कर इस भव्य आयोजन को पूर्ण किया गया।आज मुख्य अतिथि के रूप में श्री आशुतोष टण्डन (पूर्व कैबिनेट मंत्री), विशिष्ट अतिथि में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री रविन्द्र जायसवाल , पूर्व राज्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी,राकेश पांडेय जी (अपर जिला जज) , सेवा भारती प्रांतीय अध्यक्ष श्री राहुल सिंह जी इत्यादि लोग मौज़ूद रहें।

माँ गंगा का इस धरा पे अवतरण
सगर नामक एक राजा को कई वर्षों बाद दिव्य रूप से साठ हज़ार पुत्रों की प्राप्ति हो गयी। एक दिन राजा सगर ने अपने साम्राज्य की समृद्धि के लिए एक अनुष्ठान करवाया। साथ ही एक अश्व उस अनुष्ठान का एक अभिन्न हिस्सा था जिसे इंद्र ने ईर्ष्यावश चुरा लिया। सगर ने उस अश्व की खोज के लिए अपने सभी पुत्रों को पृथ्वी के चारों तरफ भेज दिया। तभी वो अश्व उन्हें पाताललोक में ध्यानमग्न कपिल ऋषि के निकट मिला। पुत्रों द्वारा यह मानते हुए कि उस अश्व को कपिल ऋषि ने चुराया है, वे उनका अपमान करने लगे और उनकी तपस्या को भंग कर दिया। ऋषि ने कई वर्षों में पहली बार अपने नेत्रों को खोला और सगर के बेटों को देखा। इस दृष्टिपात से वे सभी के सभी साठ हजार पुत्र जलकर भस्म हो गए।अंतिम संस्कार न किये जाने के कारण सगर के पुत्रों की आत्माएं प्रेत बनकर विचरने लगीं। जब सगर के एक वंशज भगीरथ ने इस दुर्भाग्य के बारे में सुना तो उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे गंगा को पृथ्वी पर लायेंगे ताकि उसके जल से सगर के पुत्रों के पाप धुल सकें और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके।
भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए ब्रह्मा जी की तपस्या की। ब्रह्मा जी मान गए और गंगा को आदेश दिया कि वह पृथ्वी पर जाये और वहां से पाताललोक जाये ताकि भगीरथ के वंशजों को मोक्ष प्राप्त हो सके। गंगा को यह काफी अपमानजनक लगा और उसने तय किया कि वह पूरे वेग के साथ स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेगी और उसे बहा ले जायेगी। तब भगीरथ ने घबराकर शिवजी से प्रार्थना की कि वे गंगा के वेग को कम कर दें।
गंगा पूरे अहंकार के साथ शिव के सिर पर गिरने लगी। लेकिन शिव जी ने शांति पूर्वक उसे अपनी जटाओं में बांध लिया और केवल उसकी छोटी-छोटी धाराओं को ही बाहर निकलने दिया। शिव जी का स्पर्श प्राप्त करने से गंगा और अधिक पवित्र हो गयी।पाताललोक की तरफ़ जाती हुई गंगा ने पृथ्वी पर बहने के लिए एक अन्य धारा का निर्माण किया ताकि अभागे लोगों का उद्धार किया जा सके। गंगा एकमात्र ऐसी नदी है जो तीनों लोकों में बहती है-स्वर्ग, पृथ्वी, तथा पाताल। इसलिए संस्कृत भाषा में उसे “त्रिपथगा” कहा जाता है।भगीरथ के प्रयासों से गंगा के पृथ्वी पर आने के कारण उसे भगीरथी भी कहा जाता है पृथ्वी पर आने के बाद गंगा जब भगीरथ की तरफ बढ़ रही थी, उसके पानी के वेग ने काफी हलचल पैदा की और जाह्नू नामक ऋषि की साधना तथा उनके खेतों को नष्ट कर दिया। इससे क्रोधित होकर उन्होंने गंगा के समस्त जल को पी लिया। तब देवताओं ने जाह्नू से प्रार्थना की कि वे गंगा को छोड़ दें ताकि वह अपने कार्य हेतु आगे बढ़ सके। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर जाह्नू ने गंगा के जल को अपने कान के रास्ते से बह जाने दिया। इस प्रकार गंगा का नाम जान्ह्वी (जाह्नू की पुत्री) पड़ा। ऐसी मान्यता है कि सरस्वती नदी के समान ही, कलयुग के अंत तक गंगा पूरी तरह से सूख जायेगी और उसके साथ ही यह युग भी समाप्त हो जायेगा। उसके बाद सतयुग (अर्थात सत्य का काल) का उदय होगा।
इस महोत्सव में अधिवक्ता रविन्द्र नाथ मिश्र, सतीश चंद्र मिश्र , भाजपा नेता देवेंद्र नाथ मिश्र, धीरेंद्र पांडेय, राकेश पांडेय, सुरेंद्र नाथ मिश्र, श्रवण मिश्र, राजनी केशरी, नीतू मेहरोत्रा, श्वेता केशरी, कुशल पाल, यश चतुर्वेदी, संतोष कश्यप, विजय त्रिपाठी, अजय दुबे ,सुजीत, संतोष, राजू, राकेश, सुधीर मिश्र, शशिप्रकाश सिंह , नमिता कुशवाहा, श्वेता तुलसियान, प्रतिभा पाण्डेय, संजय केशरी तथा हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहें।

मॉ गंगा को लगा प्रसाद का भोग
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