July 1, 2022

धर्म की रक्षा हेतु श्री राम, गुरु विश्वामित्र के साथ वन को चले- बालक दास जी

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वाराणसी/संसद वाणी

अखिल भारतीय सनातन समिति द्वारा जैतपुरा स्थित मां बागेश्वरी देवी के प्रांगण में आयोजित संगीतमय रामकथा के चौथे दिन काशी के सुप्रसिद्ध मानस वक्ता पंडित राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि रामचरितमानस के प्रत्येक चौपाइयों के सुनने एवं उसके अनुसार अपने जीवन में कुछ ही अंश यदि हम अपने जीवन में उतार ले तो भी समाज एवं परिवार का कल्याण होना निश्चित है। ऐसा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने भी ऋषि मुनियों के द्वारा बताए गए सुझाव पर स्वयं अमल किया था।

प्रमुख वक्ता पूज्य संत बालक दास जी महाराज

अंत में प्रमुख वक्ता पूज्य संत बालक दास जी महाराज ने राजा दशरथ ने धनुष विद्या एवं अन्य व्यवहारिक विद्या के अध्ययन हेतु गुरु वशिष्ट के गुरुकुल में चारों राजकुमारों को अन्य विद्यार्थियों की तरह ही अध्ययन करने के लिए भेजा जो की अल्प समय में ही उन चारों भाइयों ने पूर्णता हासिल कर राजभवन को लौट चलें। लेकिन एक दिन गुरु विश्वामित्र ने अयोध्या आकर राजा दशरथ के दरबार में ऋषि मुनियों के द्वारा किए जा रहे यज्ञ की रक्षा के लिए यह सुनकर राजा अवाक रह गए। लेकिन लोग कहीं एवं धर्म की रक्षा करने हेतु उन्होंने राम लक्ष्मण दोनों राजकुमारों को बड़े ही विनम्रता के साथ अपने हाथों से गुरु विश्वामित्र को दिया तथा जल्द ही राज भवन में वापस लाने की बात उन्होंने कहीं।
अंत में व्यासपीठ की आरती रविशंकर सिंह, डॉ अजय जायसवाल, जयशंकर प्रसाद गुप्त, प्रमोद यादव मुन्ना, वतन कुशवाहा, विनीत कुमार, मदन यादव, भैया लाल जायसवाल, राजेश सेठ, रवि प्रकाश जायसवाल, अर्चना गुप्ता, डॉ पुष्पा जयसवाल, सुजीत कुमार, बिंदु लाल गुप्ता, असीम कुमार, अलका जायसवाल, प्रदीप कुमार, डॉ गीता चौबे ने की

रामकथा में उपस्थित भक्तगण
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