July 1, 2022

निष्पक्ष पत्रकारिता ही जीवन का सत्य मूल होना चाहिये-शशिप्रताप सिंह।

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वाराणसी/संसद वाणी

आज ही के दिन 30 मई 1826 को हिंदी पत्रिका का विमोचन और शुरुआत पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता में किया था इससे पहले अंग्रेजी बंगला और फारसी के तीन ही अखबार हिंदुस्तान में प्रचलित हैं लेकिन हिंदी और हिंदुस्तान में अखबार को लाने वाले पंडित जुगल किशोर शुक्ल जी को हम याद करते है शुक्ल जी ने यह सोच कर इस उदन्त मार्तण्ड नाम की पत्रिका का शुरुआत किया कि समाज में जो विसंगतियां हैं उसका उजागर किया जाय एक आम आदमी उस चीजों को सरकार तक या राजा तक नहीं पहुंचा पाते उसको पहुंचाने की एक के आसान रास्ता पत्रकारिता के माध्यम से अखवार हर है सत्य पत्रकारिता से समाज शरीर ज्ञान और विज्ञान तीनों का वर्णन के लिए ही अखबार या पत्रिका का विमोचन कर समाज के बीच में वितरित किया जाता है लेकिन जी सपना पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने देखकर इस हिंदी अखबार को विमोचन हिंदुस्तान में किया गया जिस विश्वास के साथ भरोसे के साथ अब वो दिखाई नही देती। पत्रकार सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया सत्य की राह पर चलकर सत्य को प्रदर्शित करेंगे आज ऐसा नहीं दिखाई पड़ रहा है। क्योंकि पत्रकारिता को एक बिजनेस और पैसा कमाने का व्यापार बना दिया गया है।
कुछ अखबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पैसा कमाने के लिए पत्रकारिता का संस्कार छोड़कर पैसे के संस्कार में डूब गए है।आज के दिन मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं जिस सपने को लेकर जुगल किशोर शुल्क जी ने हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत की थी उस के मार्ग पर चलकर ही पत्रकारिता करने वाला पत्रकार निष्पक्ष पत्रकार हो सकता है। और समाज को अच्छी दिशा में ले जा सकता है। ऐसे पत्रकार साथियों को मेरा बहुत-बहुत शुभकामना बधाई अभिनंदन और वंदन है। इस आशा और विश्वास के साथ की पत्रकारिता एक विश्वास के पुरोधा के रूप में जाना जाता है उसको बरकरार रखना चाहिए।

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