July 6, 2022

100 वीं जयन्ती पर याद किये गए महान सुभाषवादी नजीर हुसैन।

Advertisement
Advertisement

नजीर हुसैन ने देश को आजादी दिलाई और भोजपुरी को सम्मान
देश के विभाजन का दर्द अंत तक नजीर को कचोटता रहा
आजाद हिन्द फौज के योद्धा नजीर हुसैन की याद में आयोजित हुई संगोष्ठी

वाराणसी/संसद वाणी

नेताजी सुभाष होते तो देश नहीं बंटने देते। हम भारत की आजादी के लिए लडे थे, विभाजन के लिए नहीं। जब तक हमारे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को देशवासी याद करते रहेंगे, देशभक्ति जिन्दा रहेगी। यह उदगार उस महान योद्धा की है जो देश को आजादी दिलाने के लिए गाजीपुर से सिंगापुर पहुंचकर नेताजी सुभाष की फौज में सम्मिलित हो गया। गाजीपुर के उसिया गांव में 15 मई 1922 को जन्में नजीर हुसैन आजाद हिन्द फौज के योद्धा थे जो द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए लड़े थे। नजीर हुसैन इस दुनियां में नहीं हैं लेकिन उनकी यादे हर सुभाषवादी के दिलो में जिंदा है।

नजीर हुसैन की 100वीं जयन्ती के अवसर पर विशाल भारत संस्थान द्वारा लमही के सुभाष भवन में महान सुभाषवादी नजीर हुसैन – आजादी के योद्धा और कला के बेताज बादशाह विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी अयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्यवक्ता वरिष्ठ पत्रकार स्नेह रंजन ने सुभाष मंदिर में मत्था टेका, राष्ट्रदेवता के चरणों मे पुष्प अर्पित किया। नेताजी एवं नजीर हुसैन की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीपोज्वल कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। बाल आजाद हिन्द बटालियन ने अतिथियों को सलामी दी, नजीर हुसैन के चित्र की आरती उतारी। भले ही नजीर हुसैन के इतिहास को कांग्रेस ने मिटाने का प्रयास किया, लेकिन सुभाषवादियों ने इस महान सुभाषवादी को याद रखा। संगोष्ठी के मुख्यवक्ता स्नेह रंजन ने नजीर हुसैन को महान सुभाषवादी देशभक्त बताते हुए कहा कि नजीर हुसैन साहब पर सुभाष चन्द्र बोस के व्यक्तित्व एवं विचारों का गहरा प्रभाव था। खुदी राम बोस के माध्यम से नजीर साहब आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए। उनके मंचन, चिंतन, लेखन एवं गीतों में सुभाष चन्द्र बोस के विचारों को स्पष्ट देख सकते थे। नजीर हुसैन के डायलॉग में समाज निर्माण और देश निर्माण के शब्द होते थे। उनके जीवन से शिक्षा मिलती है कि आप जिसके साथ हैं, मरते दम तक अपने कार्यों एवं विचारों से उसी के साथ रहें। आज उन आदर्शों के प्रति समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। राष्ट्रवाद के अनुभव को फिल्मों के माध्यम से समाज को बताया। सच्चे सुभाषवादी नजीर हुसैन साहब के 100वीं जयंती पर नमन। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि नजीर हुसैन ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ मिलकर देश को आजादी दिलाई और देश जब आजाद हो गया तब फिल्मी दुनियां में चले गए। मुम्बई में रहने के बाद भी कभी अपने गांव को नहीं भूले। अपनी फिल्मों में पूर्वांचल के गांवों की समस्या और कुरीतियों को दिखाते रहे। भोजपुरी को सम्मान दिलाया और पहली फ़िल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबे बनाकर भोजपुरी के मिठास को देशभर में फैलाया। अंत तक नेताजी सुभाष को याद करते रहे और अनंत में मिलने से एक दिन पहले नेताजी के तस्वीर के सामने खूब रोये, माफी मांगी और कहा कि हम देश का बंटवारा नहीं रोक पाए। संगोष्ठी का संचालन खुशी रमन भारतवंशी ने किया एवं धन्यवाद डा० निरंजन श्रीवास्तव ने दिया। इस संगोष्ठी में अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डा० मृदुला जायसवाल, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, स्मृति मिश्रा, लक्ष्मी, ज्ञान प्रकाश, अनिल पाण्डेय, सूरज चौधरी, दीपक आर्या, राजेश कन्नौजिया, देवेन्द्र पाण्डेय, ओम प्रकाश चौधरी, अमित कुमार, हितेन्द्र श्रीवास्तव, डा० नागेश कुमार चौबे, आशुतोष दुबे, परवेज आलम, शोभनाथ प्रजापति, सोनी चक्रवाल, सौरभ मिश्रा, जितेन्द्र चौधरी, अमित प्रकाश, अशोक विश्वकर्मा, अशोक सैनी, नवनीत गुप्ता, शुभम तिवारी, धनंजय यादव आदि लोगों ने भाग लिया।

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Previous post ऐतिहासिक स्थलों एवं राष्ट्रीय स्मारकों पर पीएसी ब्रास बैंड की वादन प्रस्तुति।
Next post आप वाराणसी ने चलाया वरुणा सफाई अभियान