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Friday, February 3, 2023

वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति ज्ञान के साथ धनोपार्जन का भी जरिया – मनोज सिन्हा

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संसद वाणी/गाजीपुर।

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल एवं गृह जनपद गाजीपुर निवासी मनोज सिन्हा ने पंडित मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज सिखड़ी में मालवीय जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई राष्ट्र के दो ऐसे सपूत रहे जो राष्ट्र के नवनिर्माण में पूरी तरह सतत प्रयत्नशील रहे। सामाजिक विद्वेष दूर कर समानता, शिक्षा, तकनीकी व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता ‌।उन्होंने कहा कि मालवीय जी तथा पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेई जी की उनके देश में किए गए योगदान के लिए मैं उनकी स्मृतियों को नमन करता हूं। देश के निर्माण में किए गए उनके अमूल्य योगदान पर व्यापक चर्चा करते हुए कहा कि नवभारत के सपनों को साकार करने के लिए महामना ने देश में समानता, शिक्षा, तकनीकी, ज्ञान विज्ञान व प्रौद्योगिकी के लिए नए युवाओं को तैयार करने के उद्देश्य से एक विश्वविद्यालय का सपना देखा और उसे मूर्त रुप दिया जो बीएचयू के रूप में आज देश के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने उसी बीएचयू से शिक्षा ली है और मेरे में जो भी अच्छाइयां हैं व मालवीय जी की प्रेरणा से है और मेरे अंदर जो भी कमी है वह मेरी स्वयं की अपनी है।


गाजीपुर से जुड़ाव की चर्चा करते हुए कहा कि मैं देश में कहीं भी रहूं, मेरी धूनी इसी मिट्टी से है।यहीं से मुझे ऊर्जा मिलती है और मैं अपने कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर पाता हूं। शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश की दोष पूर्ण शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है जो ज्ञान के साथ धनोपार्जन का भी जरिया बनेगी और रोजगार के साधन मुहैया होंगे। विगत 8 वर्षों से देश में विकास की गति तेज हुई है। आज देश में नये उच्च स्तरीय अस्पताल, मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं तो वहीं तकनीकी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी तेजी से विकास हुआ है। ब्रॉडबैंड की सुविधा गांव गांव तक पहुंचाया गया है और देश प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज भारत विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन चुका है और प्रधानमंत्री से देश विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने में सतत प्रयत्नशील हैं।

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