आखिर क्यों ? सऊदी अरब, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार-बार वेंटिलेटर से निकाल लेता है ?

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पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसे जिनेवा में 10 अरब डॉलर की मदद मिली है. प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से लेकर विदेश मंत्री तक ने मीडिया में कई बयान दिए थे. अब उनके फाइनेंस मिनिस्टर इशहाक दार ने इस कथित 10 अरब डॉलर के मदद की सच्चाई बताई है.

उन्होंने पीएम शाहबाज के बातों को भी झूठा साबित कर दिया है. बता दें कि पाकिस्तान के मीडिया में भी इसे लेकर कई खबरें सामने आई थी. अब मंत्री डार के बयान ने सऊदी अरब की भी पोल खोल दी है.डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री इशाक डार ने बुधवार को खुलासा किया कि बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान के लिए जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा की गई मदद का 90 फीसदी हिस्सा लोन है.

डॉन ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि जिनेवा में पाकिस्तान को जो 10 अरब डॉलर मदद के तौर पर देने की बात कई गई थी वो दान नहीं कर्ज है. इसे 3 साल में किश्तों में मिलेगी.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2020 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर और उधार पर तेल दिया था. इस दौरान शर्त रखी गई थी कि वो 36 घंटे के नोटिस में ये पैसा वापस ले सकता है.

इतना ही नहीं पाकिस्तान को ब्याज भी चुकाना होगा. यह सिर्फ गारंटी मनी होगी यानी इसे खर्च नहीं किया जा सकता. फिलहाल इस शर्त में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं 2019 में सऊदी के क्राउन प्रिंस पाकिस्तान आए थे. इस दौरान 10 अरब डॉलर के इन्वेस्टमेंट की बात कही गई थी तो अभी भी अधूरी है. अब एक बार फिर अरब ने 10 अरब डॉलर के इन्वेंस्टमेंट की बात कही है.

मामले का खुलासा होने के बाद पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, वित्त मंत्री इशहाक डार सहित कई मंत्री मीडिया के सामने आए. डान ने अपनी खबर में बताया है कि मंत्री डार ने कहा कि 10 में से 8.7 अरब डॉलर कर्ज है. उन्होंने कहा कि वे कर्ज की शर्तों को नहीं बता सकते. वहीं पीएम शरीफ ने कहा कि उम्मीद करते हैं कि कर्ज की शर्तें सख्त नहीं होंगी. हमें पैसे कब तक मिलेंगे,

इसके बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता.डान ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि पाकिस्तान को इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, वर्ल्ड बैंक, एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक ने मिलकर 8.7 अरब डॉल देने का भरोसा दिया है. लेकिन यह सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन हैं.

कई देश इसके सदस्य हैं. इस वजह से ये पैसे दान नहीं बल्कि कर्ज है. इतना ही नहीं इस ब्याज भी देश को चुकाना होगा. बता दें कि प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा था कि सऊदी अरब ने 1 बिलियन डॉलर, चीन को 100 मिलियन डॉलर, कतर को 25 मिलियन डॉलर, कनाडा को 18.6 मिलियन डॉलर, डेनमार्क को 3.8 मिलियन डॉलर, यूरोपीय संघ को 87 मिलियन यूरो, फ्रांस को 380 मिलियन यूरो, जर्मनी को 84 मिलियन डॉलर, इटली 23m और अजरबैजान ने 2m देने की बात कही थी.

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